जानकारी प्रजापति समाज के बारे में बन्धुओ के विचार (Prajapati bandhuo ke vichar )
पहले जाति सूचक शब्द *कुम्हार* लगाते थे, फिर प्रजापत लगाने लगे, फिर पॉटर, फिर गौत्र लगाने लगे, आजकल प्रजापति जातिसूचक शब्द प्रचलन में है। जाति के लिए ऊँचा शब्द लगाने के चक्कर में समाज का भला हुआ हो यह तो दिखा नहीं हां हम अलग-अलग जाति सूचक शब्द लगाने से असंगठित हो गए शेष समाज में बिखर गए। मैंने समाज के कुछ बंधुओ से चर्चा की तो पता चला कि हमारी जाति के लिए सही शब्द प्रजापत ही है। समाज में एकता स्थापित करने के लिए कई बिंदु हो सकते हैं परंतु सभी समाज जन एक ही जाति सूचक शब्द *प्रजापत* का उपयोग करने लग जाएं तो हमारा समाज संख्या की दृष्टि में कितना है यह आसानी से पता लग जाएगा। समाज की संख्यात्मक दृष्टि पता लगने से हमें अपनी शक्ति का आभास होने लगेगा। लोकतंत्र में संख्या बल को सभी सिर झुकाते है। कोई भी व्यक्ति राजनीति में सक्रिय होगा सारा समाज उसे सहयोग करेगा इस तरह से राजनीति में हम अपना प्रभाव स्थापित कर समाज का भला कर पाएंगे।
समाज के सभी स्तर पर चर्चा कर *प्रजापत* शब्द पर सर्वसम्मति देनी चाहिए।
पुराने लोगों ने जाति के रूप में कुछ भी लिखा हो किन्तु अब आगे की पीढ़ी में सभी प्रजापत लगाना प्रारम्भ कर सकते है। सिर्फ एक शब्द लगाकर हम समाज को संगठित एवं शक्तिशाली बना सकते है।
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